Labour Court Online Complaint 2026: लेबर कोर्ट में ऑनलाइन शिकायत कैसे करें, पूरी प्रक्रिया

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क्या आपकी Salary नहीं मिली या बिना कारण नौकरी से निकाल दिया गया? जानिए Labour Court Online Complaint की पूरी प्रक्रिया, Official Portal, Helpline Number, जरूरी Documents और Complaint Status चेक करने का आसान तरीका।

भारत सरकार और विभिन्न राज्य सरकारों ने श्रमिकों को न्याय दिलाने के लिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा उपलब्ध कराई है। हालांकि अधिकांश मामलों में सीधे लेबर कोर्ट जाने के बजाय पहले संबंधित Labour Commissioner (श्रम आयुक्त) या Conciliation Officer (सुलह अधिकारी) के पास शिकायत दर्ज करनी होती है। यदि वहां विवाद का समाधान नहीं होता, तब मामला आगे लेबर कोर्ट या इंडस्ट्रियल ट्रिब्यूनल तक पहुंचता है।

इस लेख में हम विस्तार से जानेंगे कि Labour Court Online Complaint कैसे करें, कौन शिकायत कर सकता है, किन मामलों में शिकायत दर्ज की जा सकती है और शिकायत करने से पहले किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। हम आपको Industrial Disputes Act, 1947 के प्रावधानों के आधार पर पूरी Step-by-Step प्रक्रिया बता रहे हैं — Labour Court में केस कौन कर सकता है, Demand Letter से लेकर Labour Commissioner Office और अंत में Labour Court तक मामला कैसे पहुंचता है, इसकी संपूर्ण और अपडेटेड जानकारी।

Labour Court Online Complaint 2026: लेबर कोर्ट में ऑनलाइन शिकायत कैसे करें, पूरी प्रक्रिया, हेल्पलाइन नंबर, दस्तावेज़ और स्टेटस चेक

Labour Court क्या है?

Labour Court (लेबर कोर्ट) एक विशेष न्यायिक संस्था है जो कर्मचारियों और नियोक्ताओं (Employer) के बीच होने वाले औद्योगिक एवं श्रम विवादों का समाधान करती है। इसका उद्देश्य कर्मचारियों के वैधानिक अधिकारों की रक्षा करना तथा श्रम कानूनों का पालन सुनिश्चित करना है।

यदि किसी कर्मचारी के साथ सेवा संबंधी अन्याय होता है, तो लेबर कोर्ट संबंधित कानूनों के आधार पर मामले की सुनवाई करता है और आवश्यक होने पर उचित राहत प्रदान कर सकता है।

Labour Court में केस कौन कर सकता है? (Workman की परिभाषा)

Labour Court जाने से पहले यह समझना जरूरी है कि कानूनी तौर पर वहां शिकायत कौन दर्ज कर सकता है। Industrial Disputes Act, 1947 की धारा 2(s) के अनुसार, कोई भी संगठित या असंगठित, स्थायी-अस्थायी, अंशकालीन या पूर्णकालीन, अकुशल, अर्द्धकुशल या कुशल कर्मचारी जो वेतन, कमीशन या मजदूरी पर काम करता है, उसे 'Workman' (श्रमिक) माना जाता है और वही Labour Court में मामला दर्ज कर सकता है।

श्रेणी

Workman में शामिल?

सफाई कर्मचारी, हेल्पर, फैक्ट्री वर्कर

हां

सॉफ्टवेयर इंजीनियर, कस्टमर केयर एग्जीक्यूटिव

हां (अगर निर्णय लेने या किसी को टर्मिनेट करने की पावर नहीं है)

मैनेजर, सुपरवाइजर, एडमिनिस्ट्रेटिव पोस्ट

सामान्यतः नहीं

ध्यान रखें: अगर आपका पदनाम "मैनेजर" या "सुपरवाइजर" है लेकिन आपके काम की प्रकृति एक सामान्य कर्मचारी जैसी है, यानी आपके पास किसी को नौकरी से निकालने की पावर नहीं है और आपके अंडर कोई सीधे रिपोर्ट नहीं करता, तो पदनाम के आधार पर आपको Workman की श्रेणी से बाहर नहीं माना जाएगा।

लेबर कोर्ट में केस करने के मुख्य कारण (कब जाएं?)

किन परिस्थितियों में आप लेबर कोर्ट जा सकते हैं, यह जानना भी जरूरी है। नीचे दी गई स्थितियों में आप लेबर कोर्ट का दरवाजा खटखटा सकते हैं:

  1. बिना नोटिस नौकरी से निकालना (Illegal Termination): अगर आपको बिना कारण बताए या बिना नोटिस पीरियड दिए नौकरी से निकाल दिया गया है।
  2. वेतन का भुगतान न करना: लगातार 2-3 महीने से सैलरी नहीं मिली है।
  3. न्यूनतम वेतन का भुगतान न करना: सरकार द्वारा तय न्यूनतम मजदूरी से कम भुगतान करना।
  4. ओवरटाइम का भुगतान न करना: कानूनी समय से अधिक काम करवाना लेकिन ओवरटाइम न देना।
  5. ग्रेच्युटी और बोनस का भुगतान न करना: कंपनी बोनस और ग्रेच्युटी नहीं दे रही है।
  6. गलत तरीके से ट्रांसफर करना: कंपनी पॉलिसी के खिलाफ किसी कर्मचारी को ट्रांसफर करना।
  7. सेवा लाभों से वंचित रखना: कंपनी आपको सेवा लाभ (PF, ESI, ग्रेच्युटी आदि) से वंचित रख रही है।
  8. सरकार द्वारा तय महंगाई भत्ते का भुगतान न करना।
  9. बोनस (Bonus) का भुगतान नहीं किया गया।
  10. अवकाश (Leave) का भुगतान नहीं किया गया।
  11. नियुक्ति की शर्तों का उल्लंघन किया गया।
  12. कार्यस्थल पर श्रम कानूनों का पालन नहीं किया गया।
  13. अनुचित ट्रांसफर या अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई।
  14. कानूनी अधिकार मांगने पर नौकरी से निकाल दिया गया।

कर्मचारी एवं श्रमिकों के लिए उपयोगी गाइड

कौन Labour Court में शिकायत कर सकता है?

आमतौर पर निम्न प्रकार के कर्मचारी शिकायत दर्ज कर सकते हैं—

  • प्राइवेट कंपनी के कर्मचारी
  • फैक्ट्री कर्मचारी
  • कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारी
  • दैनिक वेतनभोगी (Daily Wage Worker)
  • अस्थायी कर्मचारी
  • स्थायी कर्मचारी
  • अंशकालिक (Part-Time) कर्मचारी
  • पूर्णकालिक (Full-Time) कर्मचारी
  • कुशल एवं अकुशल श्रमिक
  • निर्माण कार्य (Construction) से जुड़े श्रमिक
  • होटल, दुकान और व्यावसायिक संस्थानों में कार्यरत कर्मचारी

यदि कर्मचारी श्रम कानूनों के अंतर्गत Workman की श्रेणी में आता है, तो वह संबंधित विवाद के लिए श्रम विभाग या लेबर कोर्ट की सहायता ले सकता है।

कौन सामान्यतः Workman की श्रेणी में नहीं आता?

सामान्य परिस्थितियों में निम्न श्रेणी के कर्मचारी Workman की परिभाषा में नहीं आते—

  • Manager
  • Administrative Officer
  • अधिकांश Supervisory पदों पर कार्यरत कर्मचारी (जहां प्रबंधकीय अधिकार हों)
  • ऐसे अधिकारी जिन्हें कर्मचारियों की नियुक्ति, निलंबन या सेवा समाप्ति का अधिकार प्राप्त हो

हालांकि केवल पदनाम (Designation) के आधार पर निर्णय नहीं होता। यदि किसी कर्मचारी का पद Manager या Supervisor है, लेकिन उसका वास्तविक कार्य सामान्य कर्मचारी जैसा है, तो संबंधित प्राधिकरण तथ्यों के आधार पर निर्णय ले सकता है।

Labour Court जाने से पहले किन बातों का ध्यान रखें?

बहुत से कर्मचारी सीधे लेबर कोर्ट जाने का प्रयास करते हैं, जबकि अधिकांश मामलों में पहले श्रम विभाग के समक्ष शिकायत दर्ज करना आवश्यक होता है।

शिकायत करने से पहले निम्न दस्तावेज सुरक्षित रखें—

  • नियुक्ति पत्र (Appointment Letter)
  • ऑफर लेटर
  • कर्मचारी पहचान पत्र (ID Card)
  • वेतन पर्ची (Salary Slip)
  • बैंक स्टेटमेंट
  • उपस्थिति रिकॉर्ड
  • PF या ESI से संबंधित दस्तावेज
  • कंपनी के साथ हुई ईमेल या व्हाट्सएप बातचीत
  • नौकरी से निकाले जाने का पत्र (यदि उपलब्ध हो)

ये दस्तावेज आपके दावे को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शिकायत दर्ज करने से पहले कर्मचारी क्या करें?

यदि आपकी सैलरी रोक दी गई है या बिना कारण नौकरी से निकाल दिया गया है, तो घबराने के बजाय पहले सभी आवश्यक प्रमाण एकत्र करें।

यदि संभव हो, तो कंपनी को लिखित रूप में अपनी समस्या बताएं और उसकी प्रति अपने पास सुरक्षित रखें। कई मामलों में लिखित संवाद के बाद विवाद का समाधान प्रारंभिक स्तर पर ही हो जाता है। यदि समाधान नहीं होता, तब श्रम विभाग में शिकायत दर्ज करना अगला उचित कदम होता है।

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लेबर कोर्ट जाने के लिए जरूरी दस्तावेज (Important Documents)

शिकायत और केस के लिए निम्नलिखित दस्तावेजों की जरूरत पड़ेगी:

क्र.सं.

दस्तावेज का नाम

विवरण

1

नियुक्ति पत्र (Appointment Letter)

कंपनी में जॉइनिंग के समय मिला पत्र

2

पे-स्लिप (Payslips) UAN Number

कम से कम 6 महीने की सैलरी स्लिप और PF नंबर अगर हो तो

3

बैंक स्टेटमेंट (Bank Statement)

जिससे सैलरी की पुष्टि हो सके

4

आईडी कार्ड (ID Card)

कंपनी द्वारा जारी पहचान पत्र

5

उपस्थिति रजिस्टर (Attendance Record)

अगर आपके पास हो

6

टर्मिनेशन लेटर (Termination Letter)

अगर कंपनी ने दिया हो

7

डिमांड लेटर की कॉपी (Demand Letter Copy)

स्टेप 1 में भेजे गए पत्र की कॉपी

8

लेबर कमिश्नर को दी गई शिकायत की कॉपी

स्टेप 2 में दी गई शिकायत की कॉपी

Labour Court Online Complaint कैसे करें? (Step-by-Step Process)

यदि आपकी सैलरी रोक दी गई है, बिना कारण नौकरी से निकाल दिया गया है, ओवरटाइम का भुगतान नहीं किया गया है या आपके साथ किसी प्रकार का श्रम विवाद हुआ है, तो घबराने की आवश्यकता नहीं है। भारत सरकार और कई राज्य सरकारों ने श्रमिकों के लिए ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की व्यवस्था उपलब्ध कराई है।

हालांकि, अधिकांश मामलों में सीधे लेबर कोर्ट में केस दर्ज नहीं किया जाता। पहले श्रम विभाग (Labour Department) के माध्यम से सुलह (Conciliation) की प्रक्रिया अपनाई जाती है। यदि वहां समाधान नहीं होता, तो मामला आगे लेबर कोर्ट या संबंधित ट्रिब्यूनल तक भेजा जा सकता है।

स्टेप 1: कंपनी को डिमांड लेटर (Demand Letter) भेजना

जब आपको बिना नोटिस नौकरी से निकाला जाता है या सैलरी नहीं मिलती है, तो सबसे पहला कदम डिमांड लेटर (मांग पत्र) भेजना होता है। यह पत्र आपकी कंपनी को रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजना चाहिए।

डिमांड लेटर में क्या लिखें?

  • अपना नाम, पद और कंपनी का नाम।
  • आपके साथ हुई घटना का पूरा विवरण।
  • नौकरी से निकाले जाने की तारीख और कारण (अगर दिया गया है)।
  • बकाया वेतन की राशि (अगर बकाया है)।
  • यह मांग करें कि आपको नौकरी पर वापस लिया जाए या सभी बकाया राशि का भुगतान किया जाए।

लेटर किसे भेजें?
कंपनी के हायर अथॉरिटी को जैसे CMD (Chief Managing Director), MD (Managing Director) या HR हेड को रजिस्टर्ड पोस्ट से भेजें। रजिस्ट्री की स्लिप को संभाल कर रखें क्योंकि यह कोर्ट में सबूत के तौर पर काम आएगी।

इंतजार: लेटर भेजने के बाद 15 दिन तक कंपनी के जवाब का इंतजार करें। अगर 15 दिनों में कोई जवाब नहीं आता है या जवाब संतोषजनक नहीं होता है, तो अगले स्टेप पर जाएं।

स्टेप 2: लेबर कमिश्नर ऑफिस में शिकायत (Labour Commissioner Complaint)

15 दिन बीत जाने के बाद, आपको अपने एरिया के लेबर कमिश्नर ऑफिस (Labour Commissioner Office) में शिकायत दर्ज करानी होगी। लेकिन यहाँ एक महत्वपूर्ण बात समझनी होगी:

सेंट्रल गवर्नमेंट (Central Government) बनाम स्टेट गवर्नमेंट (State Government)

  • सेंट्रल गवर्नमेंट: अगर आप रेलवे, भारतीय स्टेट बैंक (SBI), किसी नेशनलाइज्ड बैंक, CBSE, IRCTC, या किसी केंद्रीय मंत्रालय में काम करते हैं (चाहे कॉन्ट्रैक्ट वर्कर हों या डेली वेजर), तो आप सेंट्रल गवर्नमेंट के कर्मचारी माने जाएंगे। ऐसे में आपको सेंट्रल लेबर कमिश्नर (CLC) के ऑफिस में शिकायत करनी होगी।
  • स्टेट गवर्नमेंट: अगर आप किसी प्राइवेट कंपनी, होटल, रेस्टोरेंट, दुकान या राज्य सरकार के किसी विभाग में काम करते हैं, तो आप स्टेट गवर्नमेंट के अंडर आते हैं। ऐसे में आपको स्टेट लेबर कमिश्नर के ऑफिस में शिकायत करनी होगी।

शिकायत कैसे लिखें?

  • आवेदन में अपना पूरा नाम और पता लिखना अनिवार्य है। गुमनाम शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं होती।
  • अपनी कंपनी का पूरा नाम और पता लिखें।
  • स्टेप 1 में भेजे गए डिमांड लेटर की कॉपी अटैच करें।
  • अपनी पूरी समस्या का विस्तृत विवरण दें।
  • सभी जरूरी दस्तावेजों की फोटोकॉपी अटैच करें (जैसे नियुक्ति पत्र, पे-स्लिप, बैंक स्टेटमेंट, टर्मिनेशन लेटर आदि)।

शिकायत कैसे दर्ज करें?

  • आप खुद जाकर हार्ड कॉपी में शिकायत जमा कर सकते हैं।
  • या फिर किसी यूनियन के माध्यम से भी शिकायत कर सकते हैं।
  • टिप: शिकायत की एक कॉपी अपने पास जरूर रखें।

स्टेप 3: समझौता प्रक्रिया (Conciliation Process)

आपके द्वारा शिकायत दर्ज करने के 15-20 दिनों के अंदर, लेबर कमिश्नर ऑफिस से आपको और आपकी कंपनी को एक नोटिस भेजा जाता है।

समझौता अधिकारी (Conciliation Officer) क्या करता है?

  • ALC (Assistant Labour Commissioner) के सामने दोनों पक्षों को बैठाया जाता है।
  • समझौता अधिकारी दोनों के बीच बातचीत कराकर मामले को समझौते (Settlement) के जरिए सुलझाने की कोशिश करता है।
  • कंपनी अपना रिप्लाई (Reply) फाइल करती है, जिस पर आप अपना रिजॉइंडर (Rejoinder) फाइल करते हैं।
  • यदि समझौता नहीं हो पाता है, तो विवाद को निर्णय के लिए श्रम न्यायालय (लेबर कोर्ट) को भेज दिया जाता है।

कानूनी समय सीमा:
समझौता प्रक्रिया के लिए कानूनन 45 दिनों का समय निर्धारित है। यदि 45 दिनों के अंदर समझौता नहीं होता है, तो आपको अधिकारी से मामले को "रेफरेंस" करने के लिए कहना चाहिए।

Labour Court Online Complaint 2026: लेबर कोर्ट में ऑनलाइन शिकायत कैसे करें, पूरी प्रक्रिया

स्टेप 4: मिनिस्ट्री में रेफरेंस (Reference to Ministry)

अगर समझौता नहीं होता है, तो लेबर कमिश्नर आपके मामले को मंत्रालय (Ministry) में भेज देता है।

  • सेंट्रल गवर्नमेंट का मामला भारत सरकार के श्रम मंत्रालय (Ministry of Labour) में जाता है।
  • स्टेट गवर्नमेंट का मामला राज्य के श्रम मंत्रालय में जाता है।

मंत्रालय की प्रक्रिया:
मंत्रालय कंपनी को फिर से एक नोटिस भेजता है। अगर 1 महीने के अंदर कंपनी जवाब नहीं देती है या मामला सुलझता नहीं है, तो मंत्रालय मामले को संबंधित लेबर कोर्ट (Labour Court) या CGIT (Central Government Industrial Tribunal) को रेफर कर देता है।

आपको क्या करना चाहिए?
मंत्रालय से लेबर कोर्ट में केस जाने पर आपको एक लेटर आएगा। अगर लेटर नहीं आता है, तो आपको खुद भी समय-समय पर पता करते रहना चाहिए कि आपका मामला कहाँ है।

स्टेप 5: लेबर कोर्ट में केस फाइल करना (Filing Case in Labour Court)

जब मामला लेबर कोर्ट में पहुँच जाता है, तो असली अदालती प्रक्रिया शुरू होती है। यह प्रक्रिया लंबी हो सकती है, लेकिन अगर आप सही तरीके से फॉलो करेंगे तो जीत निश्चित है।

  1. आवेदन (Statement of Claim) फाइल करना:
    पहली हियरिंग (Hearing) में आपको स्टेटमेंट ऑफ क्लेम (Statement of Claim) फाइल करना होता है। इसमें आपको अपने सभी सबूतों (Evidence) को अटैच करना होता है।
  2. कॉपियों की संख्या:
    कोर्ट के लिए 1 कॉपी, अपने लिए 1 कॉपी, और जितनी पार्टियां हैं (जैसे ठेकेदार और प्रिंसिपल एम्प्लॉयर) उतनी कॉपियां जमा करें।
  3. रिप्लाई और रिजॉइंडर (Reply & Rejoinder):
  • कंपनी आपके आवेदन पर अपना रिप्लाई फाइल करेगी।
  • आप उस रिप्लाई पर अपना रिजॉइंडर फाइल करेंगे।
  1. दस्तावेजों का प्रस्तुतिकरण (Production of Documents):
  • आपके द्वारा दिए गए सारे सबूतों को कोर्ट में जमा कराया जाएगा।
  • आप एप्लीकेशन लगाकर सबूतों की जांच करा सकते हैं।
  1. गवाही (Examination & Cross-Examination):
  • आपकी गवाही: आपके तरफ से एफिडेविट (Affidavit) दिया जाता है। फिर कंपनी का वकील आपसे क्रॉस-क्वेश्चन (Cross-examination) करता है ताकि आपकी बातों को झुठला सके।
  • कंपनी की गवाही: कंपनी अपने गवाह लाती है और उनका एफिडेविट देती है। फिर आपके वकील उनसे क्रॉस-क्वेश्चन करते हैं।
  1. अंतिम बहस (Final Arguments):
    सभी सबूतों और गवाही के आधार पर दोनों पक्षों के वकील अंतिम बहस करते हैं। अगर आपने वकील नहीं रखा है, तो आपको खुद बहस करनी होगी।

स्टेप 6: फैसला और अवार्ड (Final Judgement & Award)

सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद लेबर कोर्ट अपना फैसला (Award) सुनाता है।

क्या राहत मिल सकती है?

  • नौकरी पर वापस बहाली (Reinstatement)।
  • बकाया वेतन (Back Wages)।
  • बैक वेजेज (Back Pay)।
  • सेवा लाभ (Service Benefits)।
  • ब्याज और कानूनी खर्च।

कानूनी समय सीमा:
नियमों के अनुसार लेबर कोर्ट को 90 दिनों के अंदर फैसला देना होता है। लेकिन व्यावहारिक रूप से इसमें थोड़ा ज्यादा समय लग सकता है।

शिकायत, दस्तावेज़ एवं ऑनलाइन सेवाएं

सीधे लेबर कोर्ट में केस फाइल करना (Direct Approach)

क्या आप कुछ मामलों में सीधे लेबर कोर्ट जा सकते हैं?

हाँ, कुछ विशेष परिस्थितियों में आप सीधे लेबर कोर्ट जा सकते हैं:

  1. बकाया वेतन (Unpaid Wages): औद्योगिक विवाद अधिनियम की धारा 33C(2) के तहत बकाया वेतन के लिए सीधे लेबर कोर्ट में जा सकते हैं।
  2. कर्मचारी क्षतिपूर्ति (Employee Compensation): कुछ अपील और क्षतिपूर्ति से जुड़े दावों के लिए सीधे कोर्ट जा सकते हैं।

लेबर कोर्ट जाने से पहले 3 जरूरी बातें (3 Important Points Before Going)

बहुत से लोग सीधे लेबर कोर्ट चले जाते हैं और असफल होते हैं। इसलिए किसी भी कदम से पहले ये 3 बातें जरूर ध्यान रखें:

  1. वेतन रुकने पर काम बंद कर दें:
    अगर 1-2 महीने की सैलरी नहीं मिल रही है, तो तुरंत काम करना बंद कर दें और अपना बकाया मांगना शुरू करें। नहीं तो आपका पैसा फंसता चला जाएगा और बाद में मालिक आपकी मजबूरी का फायदा उठाएगा।
  2. कभी भी ब्लैंक पेपर पर साइन न करें:
    कंपनी कई बार "PF लगाना है" या "ईएसआई का फॉर्म है" बहाने से सादे कागज (Blank Paper) पर साइन करा लेती है। ऐसा न करें। अगर साइन करना ही पड़े, तो पेपर पर पूरी बात लिखवा लें और डेट जरूर डालें। अगर ब्लैंक पेपर पर साइन कर दिया, तो मालिक बाद में लिख देगा कि "सैलरी ले ली" या "एडवांस ले लिया" और आपका केस कोर्ट में रिजेक्ट हो सकता है।
  3. सीधे कोर्ट न जाएं, पहले वकील से सलाह लें:
    सीधे लेबर कोर्ट जाने के बजाय पहले किसी जानकार वकील से सलाह लें और अपनी कंपनी को लीगल नोटिस (Legal Notice) भेजें। अक्सर लीगल नोटिस मिलने पर कंपनी बिना कोर्ट जाए ही समझौता कर लेती है।

लेबर कोर्ट में ऑनलाइन कंप्लेंट कैसे करें? (Online Complaint Process)

सरकार ने श्रमिकों की सुविधा के लिए समाधान पोर्टल (Samadhan Portal) लॉन्च किया है, जहाँ आप ऑनलाइन शिकायत दर्ज कर सकते हैं। यह पोर्टल बिना किसी वकील के घर बैठे शिकायत करने की सुविधा देता है।

समाधान पोर्टल पर शिकायत करने की स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया:

  1. ब्राउजर खोलें: अपने मोबाइल के किसी भी ब्राउजर (Google Chrome, UC Browser आदि) को ओपन करें।
  2. सर्च करें: "Samadhan Portal" या "Samadhan Portal Ministry of Labour" सर्च करें।
  3. वेबसाइट पर जाएं: Ministry of Labour & Employment की आधिकारिक वेबसाइट पर क्लिक करें। यह वेबसाइट भारत सरकार की है।
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  1. रजिस्ट्रेशन करें:
    • Register या Register for New User पर क्लिक करें।
    • अपना नाम डालें।
    • अपना ईमेल आईडी डालें।
    • अपना मोबाइल नंबर डालें।
    • Register As में Individual सेलेक्ट करें।
    • कैप्चा (Captcha) कोड डालें और Submit पर क्लिक करें।
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  1. OTP वेरिफाई करें:
    • आपके मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा।
    • OTP को एंटर करें और Verify पर क्लिक करें।
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  1. लॉगिन करें:
    • रजिस्ट्रेशन के बाद आपके मोबाइल पर एक वेरिफिकेशन कोड आएगा।
    • वेरिफिकेशन कोड डालें और Submit करें।
    • अब आपका डैशबोर्ड खुल जाएगा (Welcome Message दिखेगा)।
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  1. नई एप्लीकेशन (New Application):
    • New Application पर क्लिक करें।
    • Do you have Universal Account Number (UAN)? - अगर UAN है तो Yes, नहीं तो No पर क्लिक करें और Next पर जाएं।
  2. फॉर्म भरें:
    • Name of Individual Workman: अपना नाम डालें।
    • Designation: आपका पद (जैसे- वर्कमैन, कर्मचारी आदि) डालें।
    • Address: अपना पूरा पता डालें।
    • State: अपना राज्य सेलेक्ट करें।
    • District: अपना जिला सेलेक्ट करें।
    • Pin Code: अपना पिन कोड डालें।
    • Principal Employer: कंपनी का पूरा नाम और पता डालें।
    • Head Office Address: अगर अलग है तो डालें।
  3. शिकायत का प्रकार (Type of Claim):
    • General Complaint या Any Other Grievance सेलेक्ट करें।
  4. शिकायत का विवरण:
    • अपनी पूरी समस्या का Short Description डालें।
    • PDF फाइल अपलोड करें: एक पीडीएफ फाइल (अधिकतम 5 MB) अपलोड करें जिसमें आपने अपनी पूरी शिकायत (कब जॉइन किए, कितनी सैलरी तय थी, कितना बकाया है आदि) लिखी हो। इसे किसी साइबर कैफे से टाइप करवा सकते हैं।
  5. Submission:
    • Declaration को ऑन करें।
    • Submit पर क्लिक करें।
  6. Application ID:
    • सबमिट करने के बाद आपको एक Application ID मिलेगा।
    • इस ID को संभाल कर रखें और प्रिंट आउट निकलवा लें।
  7. आगे की प्रक्रिया:
    • लगभग 2 सप्ताह (15-20 दिन) के अंदर आपको संबंधित लेबर कमिश्नर ऑफिस से फोन कॉल आएगा।
    • आपको अपने सभी मूल दस्तावेज लेकर वहाँ जाना होगा और अपना केस प्रस्तुत करना होगा।
    • सबूत साबित होने पर आपका बकाया पैसा मिल जाएगा और कंपनी को हरजाना भी देना पड़ सकता है।

जरूर पढ़ें: सरकारी योजनाओं से जुड़ी अन्य महत्वपूर्ण जानकारी

Labour Commissioner की भूमिका

शिकायत दर्ज होने के बाद संबंधित Conciliation Officer (सुलह अधिकारी) या Labour Commissioner दोनों पक्षों को सुनवाई के लिए बुला सकते हैं।

इस चरण में—

  • कर्मचारी अपना पक्ष रखता है।
  • नियोक्ता अपना उत्तर देता है।
  • दोनों पक्षों के बीच समझौते का प्रयास किया जाता है।

यदि विवाद का समाधान हो जाता है, तो मामला यहीं समाप्त हो सकता है।

यदि समझौता नहीं होता, तो संबंधित अधिकारी आवश्यक कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मामले को आगे लेबर कोर्ट/ट्रिब्यूनल के लिए भेज सकते हैं।

किन मामलों में ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है?

SAMADHAN Portal पर सामान्यतः निम्न प्रकार की शिकायतें दर्ज की जा सकती हैं—

  • वेतन नहीं मिला
  • वेतन में अवैध कटौती
  • अवैध रूप से नौकरी से निकालना
  • न्यूनतम वेतन का भुगतान नहीं
  • ओवरटाइम का भुगतान नहीं
  • बोनस नहीं मिला
  • ग्रेच्युटी का भुगतान नहीं
  • मातृत्व लाभ नहीं मिला
  • अन्य औद्योगिक विवाद एवं सेवा शर्तों से संबंधित शिकायतें

राज्य स्तर पर शिकायत कैसे करें?

कई राज्यों ने अपने-अपने ऑनलाइन श्रम पोर्टल भी उपलब्ध कराए हैं।

उदाहरण—

  • राजस्थान – Labour Department Portal / LDMS
  • उत्तर प्रदेश – Labour Department Portal
  • महाराष्ट्र – Labour Department Portal

यदि आपके राज्य में ऑनलाइन सुविधा उपलब्ध नहीं है या मामला राज्य स्तर का है, तो संबंधित Labour Commissioner Office में ऑफलाइन आवेदन भी दिया जा सकता है।

महत्वपूर्ण आधिकारिक लिंक

नीचे दिया गया HTML सीधे Blogger के HTML Editor में उपयोग किया जा सकता है।

सेवा लिंक
SAMADHAN Portal SAMADHAN Portal - Online Labour Complaint
Ministry of Labour & Employment Labour Ministry Official Website
e-Shram Portal e-Shram Official Portal
Rajasthan LDMS Rajasthan Labour Department Portal

शिकायत करते समय इन गलतियों से बचें

  • बिना प्रमाण के शिकायत न करें।
  • गलत जानकारी न दें।
  • फर्जी दस्तावेज अपलोड न करें।
  • Application Number सुरक्षित रखें।
  • सभी दस्तावेज स्पष्ट (Readable) PDF/JPG में अपलोड करें।
  • यदि अधिकारी अतिरिक्त दस्तावेज मांगे तो समय पर उपलब्ध कराएं।

Labour Court Complaint Status कैसे चेक करें?

ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने के बाद सबसे महत्वपूर्ण बात होती है उसकी स्थिति (Status) की जानकारी रखना। यदि आपने SAMADHAN Portal या राज्य के श्रम विभाग के पोर्टल पर शिकायत दर्ज की है, तो सामान्यतः आवेदन संख्या (Application/Reference Number) की सहायता से उसकी प्रगति देखी जा सकती है। कुछ राज्यों के श्रम विभाग अपने पोर्टल पर शिकायत या आवेदन की स्थिति देखने की सुविधा भी प्रदान करते हैं।

शिकायत दर्ज होने के बाद क्या होता है?

शिकायत सबमिट होने के बाद सामान्यतः निम्न प्रक्रिया अपनाई जाती है—

  1. शिकायत की प्रारंभिक जांच की जाती है।
  2. संबंधित श्रम अधिकारी (Conciliation Officer) या Labour Commissioner मामले की समीक्षा करते हैं।
  3. कर्मचारी और नियोक्ता दोनों को नोटिस जारी किया जा सकता है।
  4. दोनों पक्षों के बीच समझौता (Conciliation) कराने का प्रयास किया जाता है।
  5. यदि समझौता हो जाता है तो मामला वहीं समाप्त हो सकता है।
  6. यदि समझौता नहीं होता और मामला कानूनी रूप से उपयुक्त है, तो उसे आगे Labour Court या Industrial Tribunal के समक्ष भेजा जा सकता है।

ध्यान दें: प्रत्येक मामले में समय अलग-अलग हो सकता है। यह विवाद की प्रकृति, दस्तावेजों की उपलब्धता और संबंधित विभाग की प्रक्रिया पर निर्भर करता है।

महत्वपूर्ण हेल्पलाइन एवं संपर्क

यदि आपको ऑनलाइन शिकायत करने में समस्या आ रही है, तो आप संबंधित आधिकारिक माध्यमों से सहायता ले सकते हैं।

e-Shram Helpdesk

  • Helpdesk Number: 14434
  • Alternate Number: 1800-889-6811
  • समय: प्रतिदिन सुबह 9:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक।

राजस्थान श्रम विभाग (LDMS)

  • Technical Help Desk: 0141-2450793
  • Construction Workers Support:
    • 0141-2222961
    • 0141-2222861
    • 0141-2220334

Labour Court में शिकायत करते समय ध्यान रखने योग्य बातें

  • केवल सही और सत्य जानकारी ही दर्ज करें।
  • सभी दस्तावेज स्पष्ट एवं पढ़ने योग्य (Readable) अपलोड करें।
  • आवेदन संख्या (Application Number) सुरक्षित रखें।
  • सुनवाई की तारीख मिलने पर समय पर उपस्थित हों।
  • यदि अतिरिक्त दस्तावेज मांगे जाएं तो निर्धारित समय में जमा करें।
  • बिना प्रमाण के झूठी शिकायत दर्ज करने से बचें।

क्या बिना वकील के शिकायत की जा सकती है?

हाँ, प्रारंभिक स्तर पर श्रम विभाग में शिकायत स्वयं भी दर्ज की जा सकती है। हालांकि यदि मामला Labour Court या Tribunal तक पहुँचता है और कानूनी जटिलताएँ अधिक हैं, तो अनुभवी अधिवक्ता से सलाह लेना उपयोगी हो सकता है।

Labour Court Complaint से जुड़े अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

क्या Labour Court में ऑनलाइन शिकायत की जा सकती है?

हाँ, कई मामलों में श्रम विभाग के आधिकारिक पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन शिकायत दर्ज की जा सकती है। उपलब्ध सुविधा राज्य और मामले की प्रकृति पर निर्भर करती है।

क्या वेतन नहीं मिलने पर शिकायत कर सकते हैं?

यदि आपका वेतन नियमों के अनुसार नहीं दिया गया है या लंबे समय से बकाया है, तो आप संबंधित श्रम विभाग में शिकायत कर सकते हैं।

क्या बिना कारण नौकरी से निकालने पर शिकायत की जा सकती है?

यदि आपको लागू श्रम कानूनों के विपरीत तरीके से सेवा से हटाया गया है, तो आप संबंधित प्राधिकारी के समक्ष अपना मामला प्रस्तुत कर सकते हैं।

शिकायत के लिए कौन-कौन से दस्तावेज जरूरी हैं?

  • नियुक्ति पत्र
  • वेतन पर्ची
  • बैंक स्टेटमेंट
  • कर्मचारी पहचान पत्र
  • उपस्थिति रिकॉर्ड
  • टर्मिनेशन लेटर (यदि उपलब्ध हो)
  • अन्य संबंधित प्रमाण

क्या ऑनलाइन शिकायत का स्टेटस देखा जा सकता है?

यदि संबंधित पोर्टल यह सुविधा देता है, तो आवेदन संख्या की सहायता से शिकायत की स्थिति देखी जा सकती है।

Labour Court से जुड़े सामान्य सवाल (FAQs)

1. क्या मैं सीधे Labour Court में केस कर सकता हूं?

सामान्यतः नहीं। पहले Labour Commissioner Office में शिकायत दर्ज करानी होती है। हालांकि, बकाया वेतन से जुड़े मामले Industrial Disputes Act की धारा 33C(2) के तहत सीधे Labour Court या Central Labour Court में दाखिल किए जा सकते हैं।

2. Labour Court में केस दर्ज कराने में कितना समय लगता है?

Conciliation Officer के पास 45 दिन और Labour Court के पास नियमानुसार 90 दिन का समय तय है, लेकिन व्यवहारिक रूप से इसमें अधिक समय लग सकता है।

3. क्या Labour Court में केस के लिए वकील रखना अनिवार्य है?

नहीं, यह अनिवार्य नहीं है। कर्मचारी बिना वकील की सहायता के भी अपना केस खुद दायर कर सकता है, हालांकि जटिल मामलों में कानूनी सलाह लेना फायदेमंद रहता है।

4. मैनेजर या सुपरवाइजर पद पर काम करने वाले Labour Court में शिकायत कर सकते हैं?

सामान्यतः प्रबंधकीय या प्रशासनिक पद पर काम करने वाले Workman की परिभाषा में नहीं आते। हालांकि अगर पद का नाम भले ही मैनेजर हो लेकिन काम की प्रकृति सामान्य कर्मचारी जैसी है, तो वह Workman माना जा सकता है।

5. Demand Letter का जवाब न मिलने पर क्या करें?

15 दिन इंतजार करने के बाद, आप उसी पत्र की कॉपी के साथ संबंधित Labour Commissioner Office में लिखित शिकायत दर्ज करा सकते हैं।

6. Central Government और State Government के Labour Court में क्या अंतर है?

रेलवे, बैंक, IRCTC जैसे केंद्रीय संस्थानों के कर्मचारी CGIT (Central Government Industrial Tribunal) में जाते हैं, जबकि प्राइवेट कंपनी या राज्य सरकार के कर्मचारी राज्य के Labour Court में शिकायत दर्ज कराते हैं।

7. Labour Court से क्या राहत मिल सकती है?

Labour Court सेवामुक्त कर्मचारी को पुनः नौकरी में बहाल करने, बकाया वेतन, बैक वेजेज, सेवा लाभ और कानूनी खर्च से जुड़ी राहत प्रदान कर सकता है।

8. क्या ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है?

हां, केंद्रीय स्तर पर Samadhan Portal के माध्यम से घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर से ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है।

करियर और रोजगार से जुड़ी जरूरी जानकारी

निष्कर्ष

यदि किसी कर्मचारी को वेतन नहीं मिल रहा, अवैध रूप से नौकरी से हटाया गया है या अन्य श्रम अधिकारों का उल्लंघन हुआ है, तो समय रहते उचित प्रक्रिया अपनाना महत्वपूर्ण है। सबसे पहले सभी दस्तावेज और प्रमाण सुरक्षित रखें, आवश्यक होने पर नियोक्ता को लिखित सूचना दें, फिर संबंधित श्रम विभाग में शिकायत दर्ज करें। यदि प्रारंभिक स्तर पर समाधान नहीं निकलता, तो मामला आगे Labour Court या संबंधित न्यायिक मंच तक पहुँच सकता है।

सही जानकारी, उचित दस्तावेज और निर्धारित प्रक्रिया का पालन करने से आपकी शिकायत प्रभावी ढंग से आगे बढ़ सकती है।

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