भारत के दक्षिणी राज्य केरल की राजधानी तिरुवनंतपुरम (Thiruvananthapuram) में स्थित Sree Padmanabhaswamy Temple न केवल अपनी भव्यता के लिए, बल्कि अपने रहस्यमय खजाने और दिव्य रहस्यों के लिए भी प्रसिद्ध है। यह मंदिर भगवान विष्णु को समर्पित है और इसे विश्व का सबसे धनी मंदिर (Richest Temple in the World) कहा जाता है।
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर, भगवान विष्णु के 108 दिव्य देशम में से एक, यह मंदिर अपनी भव्यता, रहस्यमयी खजाने और त्रावणकोर राजवंश के समर्पण के लिए विश्व प्रसिद्ध है। क्या आप जानते हैं कि तिरुवनंतपुरम शहर का नाम इसी मंदिर के अधिष्ठाता देवता श्री अनंत पद्मनाभस्वामी के नाम पर रखा गया है? इस लेख में, हम आपको पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास, इसके रहस्य, वास्तुकला, दर्शन समय, और भक्ति से जुड़ी कहानियों के बारे में विस्तार से बताएंगे। आइए, इस आध्यात्मिक यात्रा पर चलें!
पद्मनाभस्वामी मंदिर का ऐतिहासिक महत्व
पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुराना है और यह भगवान विष्णु की भक्ति का प्रतीक है। प्राचीन ग्रंथों जैसे विष्णु पुराण, स्कंद पुराण, और पद्म पुराण में इस मंदिर का उल्लेख मिलता है। माना जाता है कि यह मंदिर कलयुग के प्रारंभ से भी पहले स्थापित हुआ था।
मंदिर की स्थापना की कथा
पौराणिक कथाओं के अनुसार, मुनि दिवाकर को भगवान विष्णु ने अपने विराट रूप में दर्शन दिए। भगवान का यह रूप इतना विशाल था कि उनका सिर तिरुवट्टार, धड़ तिरुवनंतपुरम, और चरण त्रिप्पदापुरम में थे। मुनि की प्रार्थना पर भगवान ने अपने रूप को छोटा किया और इस स्थान पर अनंत काल तक निवास करने का वचन दिया। त्रावणकोर के राजा ने इस पवित्र स्थान पर मंदिर का निर्माण कराया, और भगवान की मूर्ति को तीन द्वारों से दर्शन के लिए स्थापित किया गया:
- पहला द्वार: भगवान का सिर और छाती।
- दूसरा द्वार: नाभि पर विराजमान ब्रह्मा।
- तीसरा द्वार: पवित्र चरण।
18वीं शताब्दी में, त्रावणकोर के राजा मार्तंड वर्मा ने मंदिर का भव्य जीर्णोद्धार कराया। उन्होंने द्रविड़ और केरल वास्तुकला का मिश्रण करते हुए मंदिर को नया स्वरूप दिया। मार्तंड वर्मा ने अपने पूरे राज्य को भगवान पद्मनाभस्वामी को समर्पित कर दिया और स्वयं को "पद्मनाभ दास" घोषित किया। इस ऐतिहासिक निर्णय को "त्रिप्पदी दानम" कहा जाता है, जो भारतीय इतिहास में अद्वितीय है।
रहस्यमयी खजाना और तहखाना बी
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर को दुनिया का सबसे धनी मंदिर माना जाता है, और इसका कारण है इसका पद्मनाभस्वामी मंदिर खजाना। 2011 में, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर मंदिर के छह तहखानों (ए, बी, सी, डी, ई, और एफ) में से पांच को खोला गया। इनमें से तहखाना ए में अरबों रुपये की कीमत के सोने के आभूषण, हीरे, मूर्तियां, और प्राचीन सिक्के मिले। अनुमान है कि खजाने की कीमत लगभग 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक है।
तहखाना बी का रहस्य
तहखाना बी आज भी दुनिया के सबसे बड़े रहस्यों में से एक है। इस तहखाने का दरवाजा विशाल सांपों के प्रतीकों से सजा है, और इसमें कोई कुंडी या ताला नहीं है। मान्यता है कि इसे केवल "गरुड़ मंत्र" के सही उच्चारण से खोला जा सकता है। गलत मंत्र उच्चारण करने पर मृत्यु का भय बताया जाता है। कुछ लोग कहते हैं कि तहखाना बी अरब सागर से जुड़ा है, और इसे खोलने से प्रलय आ सकती है।
हालांकि, पूर्व CAG विनोद राय के अनुसार, तहखाना बी 1990 और 2002 में सात बार खोला गया था, लेकिन इसका पूरा विवरण सार्वजनिक नहीं है। क्या यह तहखाना भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि से संबंधित है? यह प्रश्न आज भी अनुत्तरित है, जो मंदिर की रहस्यमयी आभा को और बढ़ाता है।
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मंदिर की वास्तुकला और विशेषताएं
पद्मनाभस्वामी मंदिर की वास्तुकला केरल और द्रविड़ शैली का एक अनुपम उदाहरण है। मंदिर का सात मंजिला गोपुरम और 365 नक्काशीदार ग्रेनाइट स्तंभों वाला गलियारा देखने लायक है। मंदिर की मुख्य मूर्ति, जो 18 फीट लंबी है, 12,008 शालिग्राम पत्थरों से बनी है, जो नेपाल की गंडकी नदी से लाए गए थे।
मंदिर की प्रमुख विशेषताएं
- ओट्टक्कल मंडपम: एक ही पत्थर से बना मंडप, जो तिरुमाला की चट्टान से काटा गया।
- नवग्रह मंडपम: छत पर नौ ग्रहों के चित्र, जो ज्योतिषीय महत्व रखते हैं।
- ध्वजस्तंभ: 80 फीट ऊंचा, सोने की परत चढ़ा हुआ।
- पद्म तीर्थम: मंदिर के पास पवित्र सरोवर, जहां श्रद्धालु स्नान करते हैं।
मंदिर का गर्भगृह तीन द्वारों से देखा जाता है, जो भगवान के विभिन्न अंगों के दर्शन प्रदान करते हैं। मंदिर की दीवारों पर भगवान विष्णु, गणपति, और नरसिंह स्वामी की भित्ति चित्रकारी आकर्षक है।
मंदिर की वास्तुकला और भगवान पद्मनाभस्वामी की मूर्ति
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर की वास्तुकला केरल और द्रविड़ शैली का एक अद्भुत संगम है, जो इसे दक्षिण भारत के सबसे सुंदर मंदिरों में से एक बनाती है।
- गोपुरम: मंदिर का मुख्य आकर्षण इसका 100 फ़ीट ऊँचा, सात-मंजिला गोपुरम है, जो पांड्य शैली में बना है।
- मूर्ति: गर्भ गृह में भगवान विष्णु की मुख्य प्रतिमा लगभग 18 फ़ीट लंबी है। यह मूर्ति 12,008 शालिग्राम पत्थरों और विशेष जड़ी-बूटियों के मिश्रण ‘कडु-शर्करा योगम्’ से बनी है।
- तीन द्वार दर्शन: भगवान के विराट स्वरूप को पूरी तरह से देखने के लिए तीन द्वार हैं:
- पहला द्वार: भगवान का मुख और सिर, उनके दाहिने हाथ के नीचे स्थित शिवलिंग।
- दूसरा द्वार: भगवान की नाभि से निकला कमल, जिस पर ब्रह्माजी विराजमान हैं।
- तीसरा द्वार: भगवान के चरण कमल।
मंदिर की वास्तुकला इस बात का प्रमाण है कि यह केवल धन का नहीं, बल्कि स्थापत्य कला और आध्यात्मिकता का भी एक अनूठा केंद्र है।
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दर्शन समय और ड्रेस कोड
पद्मनाभस्वामी मंदिर दर्शन समय श्रद्धालुओं के लिए सुबह और शाम को निर्धारित है। नीचे दर्शन समय की तालिका दी गई है:
| समय | विवरण |
|---|---|
| सुबह 3:30 - 4:45 | निर्माल्य दर्शनम |
| सुबह 6:30 - 7:00 | सामान्य दर्शन |
| सुबह 8:30 - 10:00 | सामान्य दर्शन |
| सुबह 10:30 - 11:10 | सामान्य दर्शन |
| सुबह 11:45 - 12:00 | सामान्य दर्शन |
| शाम 4:30 - 6:15 | सामान्य दर्शन |
| शाम 6:45 - 7:20 | सामान्य दर्शन |
नोट: उत्सवों के दौरान समय में बदलाव हो सकता है। नवीनतम जानकारी के लिए आधिकारिक वेबसाइट (spst.in) देखें।
पद्मनाभस्वामी मंदिर ड्रेस कोड
मंदिर में प्रवेश के लिए सख्त ड्रेस कोड है:
- पुरुष: धोती या मुंडु पहनना अनिवार्य। शर्ट, जींस, या शॉर्ट्स की अनुमति नहीं।
- महिलाएं: साड़ी, पावड़ा, या लंबी स्कर्ट और ब्लाउज। चूड़ीदार या पैंट की अनुमति नहीं।
- मंदिर के पास किराए पर धोती उपलब्ध है, लेकिन साड़ी किराए पर नहीं मिलती।
प्रमुख उत्सव और धार्मिक महत्व
पद्मनाभस्वामी मंदिर में साल भर विभिन्न उत्सव मनाए जाते हैं, जो भक्तों को आकर्षित करते हैं। कुछ प्रमुख पद्मनाभस्वामी मंदिर उत्सव निम्नलिखित हैं:
- अल्पासी उत्सव: 10 दिनों का उत्सव, जिसमें पल्लिवेटा और आराट जुलूस शामिल हैं।
- पainkuni उत्सव: मार्च/अप्रैल में मनाया जाता है, जिसमें पांडवों की विशाल मूर्तियां प्रदर्शित की जाती हैं।
- लक्षदीपम: 56 दिनों के मुरजपम के समापन पर एक लाख दीपों से मंदिर को सजाया जाता है।
- नवरात्रि पूजा: देवी सरस्वती की मूर्ति को विशेष पूजा के लिए लाया जाता है।
मंदिर को 108 दिव्य देशम में से एक माना जाता है, और यह वैष्णव भक्ति का केंद्र है। तमिल संत नम्मालवार ने अपनी रचनाओं में इस मंदिर की महिमा का गान किया है।
श्रद्धालुओं के लिए उपयोगी सुझाव
पद्मनाभस्वामी मंदिर की यात्रा को स्मरणीय बनाने के लिए निम्नलिखित सुझाव ध्यान में रखें:
- दर्शन समय: सुबह 3:30 बजे निर्माल्य दर्शनम के लिए पहुंचें, जब भीड़ कम होती है और आध्यात्मिक अनुभव गहरा होता है।
- ड्रेस कोड: उचित वस्त्र पहनें। पास की दुकानों से धोती खरीदें या किराए पर लें।
- सामान: मोबाइल, कैमरा, और अन्य सामान लॉकर में रखें। फोटोग्राफी निषिद्ध है।
- विशेष दर्शन: 150 रुपये (बिना प्रसाद) या 180 रुपये (प्रसाद सहित) में विशेष दर्शन टिकट लें।
- यात्रा: तिरुवनंतपुरम सेंट्रल रेलवे स्टेशन (600 मीटर) या अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (4 किमी) से मंदिर आसानी से पहुंचा जा सकता है।
मंदिर दर्शन और ऑनलाइन बुकिंग
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- प्रेम मंदिर वृंदावन की पूरी कहानी: प्रेम मंदिर की भव्यता और राधा-कृष्ण की भक्ति का अनुभव करें।
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(FAQs)
Q1. Sree Padmanabhaswamy Temple किस देवता को समर्पित है?
यह मंदिर भगवान विष्णु के रूप पद्मनाभ स्वामी को समर्पित है।
Q2. क्या गैर-हिंदू लोग मंदिर में प्रवेश कर सकते हैं?
नहीं, केवल हिंदू भक्तों को ही मंदिर के अंदर प्रवेश की अनुमति है।
Q3. पद्मनाभस्वामी मंदिर का Vault B क्यों नहीं खोला जाता?
कहा जाता है कि यह कक्ष दिव्य शक्तियों द्वारा सुरक्षित है और इसे खोलने से अनहोनी हो सकती है।
Q4. मंदिर का निर्माण कब हुआ था?
इसका वर्तमान स्वरूप 18वीं शताब्दी में महाराजा मार्तंड वर्मा द्वारा पुनर्निर्मित किया गया था।
निष्कर्ष
श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इतिहास, रहस्य, और भक्ति का संगम है। पद्मनाभस्वामी मंदिर का इतिहास हमें त्रावणकोर राजवंश के समर्पण और भगवान विष्णु की महिमा की याद दिलाता है। इसका खजाना और तहखाना बी आज भी दुनिया को आश्चर्यचकित करते हैं। यदि आप इस मंदिर के दर्शन करने की योजना बना रहे हैं, तो इसकी आध्यात्मिक शांति और भव्यता आपको मंत्रमुग्ध कर देगी। श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर (Sree Padmanabhaswamy Temple in Thiruvananthapuram) केवल अपनी Padmanabhaswamy Temple treasure के लिए ही नहीं, बल्कि उस गहन आस्था के लिए भी महत्वपूर्ण है जो सदियों से इस खजाने की रक्षा करती आई है।
क्या आपने कभी इस मंदिर की यात्रा की है? अपने अनुभव हमारे साथ कमेंट में साझा करें, और इस लेख को अपने दोस्तों के साथ शेयर करें। भगवान पद्मनाभस्वामी की कृपा आप पर बनी रहे!
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